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pshychology for success in stock market

Pshychology for success in stock market.

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pshychology for success in stock market


वे मानसिक कारण जो शेयर बाजार में आपकी सफलता को निर्धारित करते हैं|


जैसा कि आप जानते हैं शेयर बाजार एक गैंबलिंग  की तरह माना जाता है, ऐसे कौन से कारण है जो शेयर बाजार में आपकी सफलता को निर्धारित करते हैं और आप को सफल बनाते हैं?



आप जानते हैं शेयर बाजार में हर एक शेयर में प्रॉफिट नहीं होता है,


कुछ शेयर में प्रॉफिट होता है तो  कुछ में लॉस उठाना पड़ता है|


 अगर शेयर बाजार में शेयर की खबरों पर शेयर चलते होते तो आज शेयर बाजार में पैसा लगाने वाला हर एक ट्रेडर करोड़पति होता|


आप जानते हैं इंटरनेट के युग में सूचना मिलना कोई बहुत बड़ी कठिन बात नहीं है|



सैकड़ों ट्रेडिंग फर्म फोन पर आपको  टिप  देने की बात करते हैं, और प्रॉफिट कराने की बात करते हैं तो वह खुद क्यों करोड़पति नहीं हो जाते क्यों आपको दिन-रात फोन करते हैं कभी सोचा है आपने?



सीधी सी बात है अगर टिप  पर या किसी न्यूज़ पर  शेयर बाजार चलते होते तो उन्हें आपको टिप देने की जरूरत ही ना होती|


वारेन बफेट ने कहा है कि किसी इन्वेस्टर का सबसे बड़ा गुण उसका होशियार होना नहीं स्थाई होना है|


ऐसा स्थाई होना है कि बहुत बड़े नुकसान पर भी वे विचलित ना हो और बहुत बड़े फायदे पर भी ज्यादा  आशावादी ना हो|


अब अपने आप से आप कुछ सवाल पूछिए-

👉पहला सवाल क्या होगा जब आपका इन्वेस्टमेंट 10% से भी ज्यादा गिर जाए?


 👉दूसरा सवाल क्या आप 5 साल या उससे ज्यादा के लिए इन्वेस्टमेंट करने के लिए तैयार हैं?


 👉तीसरा सवाल यदि किसी  इन्वेस्टमेंट में आपको लाभ हो तो क्या आप उसे बेच देंगे और यदि किसी इन्वेस्टमेंट में आपको नुकसान हो रहा हो तो क्या उसे रोक के रखेंगे?


 👉चौथा सवाल क्या आपको लगता है इन्वेस्टमेंट के अलावा ट्रेडिंग करना आपकी रिटर्न को बढ़ा सकता है?



वारेन बफेट कहते हैं कि इनमें से किसी भी सवाल का जवाब यदि हां है तो आपको  और ज्यादा स्थाई होने की जरूरत है|


दोस्तों जब भी आप शेयर मार्केट में इन्वेस्ट करते हैं या किसी  म्यूच्यूअल फंड को खरीदते हैं|


तब आप उस बिजनेस के मालिक हो जाते हैं, यानी अब वही आपका बिजनेस है|

आप वास्तविक कुछ भी काम करते हो या नौकरी करते हो|


 

क्या आपको लगता है कि एक बिजनेसमैन हर काम से प्रॉफिट ही बनाता है उसको कभी नुकसान नहीं होता |


तो इतने बड़े -बड़े कॉर्पोरेट आज डिफॉल्टर नहीं होते इसका मतलब बिजनेस करना रिस्क लेना है|


उस रिस्क में आप सफल भी हो सकते हैं और विफल भी हो सकते हैं|


 आप देखते हैं जब भी मार्केट में मंदी आती है तो बड़े-बड़े इन्वेस्टर भी अपने 600 से 700 करोड़ रुपए का नुकसान कर बैठते हैं तो आप क्या सोचते हैं कि हर इन्वेस्टमेंट में आप  प्रॉफिट कमा लेंगे तो यह आपकी गलत सोच है|


 मैं यहां सुझाव देना चाहता हूं कि जब भी आप को इन्वेस्टमेंट करें भले ही वह किसी शेयर में हो या फिर किसी  म्यूच्यूअल फंड में, आप अपने रिटर्न का प्रतिशत पहले से ही तैयार करके रखिए|


मानो अगर बैंक में कोई फिक्स डिपाजिट आज 5% रिटर्न दे रही है और आपका  म्यूच्यूअल फंड आपको 10% रिटर्न दे रहा है|


तो वह अच्छे ही रिटर्न है जो कि एक सेफ इन्वेस्टमेंट से दुगने हैं इसलिए इस रिटर्न को आपको बुक कर लेना चाहिए तथा वह पैसा दूसरी जगह निवेश करने का सोचना चाहिए|


 दोस्तों जैसा कि शेयर मार्केट में इन्वेस्ट करना खतरों से खेलना होता है वैसे ही जब भी आप किसी शेयर या म्यूचुअल फंड में इन्वेस्ट करते हैं तो जरूरी नहीं कि वह ऊपर की तरफ ही जाए


वह पहले नीचे भी आ सकता है ,मतलब की म्यूच्यूअल फंड आपको नेगेटिव रिटर्न भी दे सकता है


लेकिन ध्यान रखें कि उस समय आपको वह बेचना नहीं है इंतजार करना है मार्केट के ऊपर आने का और पॉजिटिव रिटर्न मिलने का |


कोई भी म्यूच्यूअल फंड नेगेटिव मार्केट परिस्थितियों में पॉजिटिव रिटर्न नहीं दे सकता है|


यह बात आपको इन्वेस्ट करने से पहले मालूम ही होनी चाहिए इसलिए जब भी किसी अच्छे स्टॉक या म्युचुअल फंड में इन्वेस्ट करें तो अब आपका समय रिटर्न पर प्रभाव डालेगा इसलिए लंबे समय के लिए ही पैसे को इन दो ऑप्शंस में लगाएं|


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